Bhajans – Hindi

Table Of Contents

आदमी जो कहता है

आदमी जो कहता है, आदमी जो सुनता है
ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं
आदमी जो देता है, आदमी जो करता है
रास्ते मे वो दुआएं पीछा करती हैं

कोई भी हो हर ख़्वाब तो अच्छा नहीं होता
बहुत ज्यादा प्यार भी अच्छा नहीं होता है
कभी दामन छुड़ाना हो, तो मुश्किल हो
प्यार के रस्ते छुटे तो, प्यार के रिश्ते टूटे तो
ज़िंदगी भर फिर वफ़ाएं पीछा करती हैं

कभी कभी मन धूप के कारण तरसता है
कभी कभी फिर दिल में, सावन बरसता है
पलक झपके यहाँ मौसम बदल जाए
प्यास कभी बुझती नहीं, इक बूँद भी मिलती नहीं

और कभी रिम झिम घटाएं पीछा करती हैं

आदमी मुसाफिर है

आदमी मुसाफिर है, आता है, जाता है
आते जाते रस्तें में यादें छोड जाता है

झोंका हवा का, पानी का रेला
मेले में रह जाए जो अकेला
फिर वो अकेला ही रह जाता है

कब छोडता है ये रोग जी को
दिल भूल जाता है जब किसीको
वो भूलकर भी याद आता है

क्या साथ लाए, क्या तोड़ आए
रस्तें में हम क्या क्या छोड़ आए
मंज़िल पे जा के याद आता है

जब डोलती है जीवन की नैय्या
कोई तो बन जाता है खेवैय्या
कोई किनारे पे ही डूब जाता है

आज अंधेरे

आज अंधेरे में है हम इंसान,
ज्ञान का सूरज चमका दे भगवान

भटक रहे हमें राह दिखा दे, भगवान राह दिखा दे
कदम कदम पर किरण बिछा दे,भगवन किरण बिछा दे
इन् अखियन को प्रभु करा दे, ज्योति से पहचान

हम तो है संतान तिहारी, प्रभु संतान तिहारी
तेरी दया के हम अधिकारी,प्रभु है हम अधिकारी
दुनिया होवे सुखी हमारी, ऐसा दे वरदान

आज के इस इंसान

आज के इस इंसान को यह क्या हो गया
इसका पुराना प्यार कहाँ पर खो गया

कैसी यह मनहूस घडी है, भाईओं में जंग छिड़ी है
कहीं पे खून कहीं पर जवाला, जाने क्या है होने वाला
सब का माथा आज झुका है, आजादी का जलूस रुका है
चरों और दगा ही दगा है, हर छुरे पर खून लगा है
आज दुखी है जनता सारी, रोते हैं लाखों नर नारी
रोते हैं आँगन गलिआरे, रोते आज मोहल्ले सारे
रोती सलमा रोती है सीता, रोते हैं कुरान और गीता
आज हिमालय चिल्लाता है, कहाँ पुराना वो नाता है
दस लिया सारे देश को जेहरी नागो ने,
घर को लगादी आग घर के चिरागों ने

अपने देश था वो देश था भाई, लाखों बार मुसीबत आई
इंसानों ने जान गवाई, पर बहनों की लाज बचाई
लेकिन अब वो बात कहाँ है, अब तो केवल घात यहाँ है
चल रहीं हैं उलटी हवाएं, कांप रहीं थर थर अबलायें
आज हर एक आँचल को है खतरा, आज हर एक घूँघट को है खतरा
खतरे में है लाज बहन की, खतरे में चूड़ीया दुल्हन की
डरती है हर पाँव की पायल, आज कहीं हो जाए ना घायल
आज सलामत कोई ना घर है, सब को लुट जाने का डर है
हमने अपने वतन को देखा, आदमी के पतन को देखा
आज तो बहनों पर भी हमला होता है,
दूर किसी कोने में मजहब रोता है

किस के सर इलज़ाम धरें हम, आज कहाँ फ़रिआद करें हम
करते हैं जो आज लड़ाई, सब के सब हैं अपने ही भाई
सब के सब हैं यहाँ अपराधी, हाय मोहोब्बत सबने भुलादी
आज बही जो खून की धारा, दोषी उसका समाज है सारा
सुनो जरा ओ सुनने वालो, आसमान पर नज़र घुमा लो
एक गगन में करोडो तारे, रहते हैं हिलमिल के सारे
कभी ना वो आपस में लड़ते, कभी ना देखा उनको झगड़ते
कभी नहीं वो छुरे चलाते, नहीं किसी का खून बहाते
लेकिन इस इंसान को देखो, धरती की संतान को देखो
कितना है यह हाय कमीना, इसने लाखों का सुख छीना
की है जो इसने आज तबाही, देगें उसकी यह मुखड़े गवाही
आपस की दुश्मनी का यह अंजाम हुआ,
दुनिया हसने लगी देश बदनाम हुआ

कैसा यह खतरे का पहर है, आज हवाओं में भी ज़हर है
कहीं भी देखो बात यही है, हाय भयानक रात यही है
मौत के साए में हर घर है, कब क्या होगा किसे खबर है
बंद है खिड़की, बंद है द्वारे, बैठे हैं सब डर के मारे
क्या होगा इन बेचारों का, क्या होगा इन लाचारों का
इनका सब कुछ खो सकता है, इनपे हमला हो सकता है
कोई रक्षक नज़र ना आता, सोआ है आकाश पे दाता
यह क्या हाल हुआ अपने संसार का,
निकल रहा है आज जनाजा प्यार का

आज मिल सब गीत

आज मिल सब गीत गाओ, उस प्रभु के धन्यवाद
जिसका यश नित गाते हैं. गन्धर्व मुनिजन धन्यवाद

मन्दिरों में कन्दरों में पर्वतों के शिखर पर
देते हैं लगातार सौ-सौ बार मुनिवर धन्यवाद

करते हैं जंगल में मंगल पक्षीगण हर शाख पर
पाते हैं आनन्द मिल गाते हैं स्वरभर धन्यवाद

कुँए में तालाब में सिन्धु की गहरी घार में
प्रेमरस में तृप्त हो करते हैं जलचर धन्यवाद

शादियों में जलसों में यज्ञ और उत्सव के आदि
मीठे स्वर से चाहिए करें नारी नर सब धन्यवाद

गान कर अमिचन्द भजनानन्द ईश्वर-स्तुति
ध्यान धर सुनते हैं श्रोता कान धर-धर धन्यवाद

आज सुनो हम गीत

आज सुनो हम गीत विदा का गा रहे
दो दुखियारे पंछी बिछडे जा रहे

बहुत दिनों के साथी हाय जुदा होते
गुम सूम आंखडियो में आंसू आ रहे

कोई मत पूछो कौन है ये क्यों रोते है
इस जग में ऐसे भी अभागे होते है

लुट गए फिर भी दिल का दर्द छिपा रहे
दो दुखियारे पंछी बिछडे जा रहे

आज सुनो हम गीत विदा का गा रहे
दो दुखियारे पंछी बिछडे जा रहे.

आना है तो आ राह में

आना है तो आ राह में, कुछ फेर नहीं है
भगवान के घर देर है, अन्धेर नहीं है

जब तुझसे न सुलझें तेरी उलझनें हुए धंधे
भगवान खुद ही तेरी मुश्किलों को आसान करेगा
जो तू नहीं कर पाया तो भगवान करेगा

कहने की ज़रूरत नहीं आना ही बहुत है
इस दर पे तेरा शीश झुकाना ही बहुत है
जो कुछ है तेरे दिल में वो सब उसको खबर है
बन्दे तेरे हर हाल पे मालिक को नज़र है

बिन मांगे भी मिलती हैं यहाँ मन की मुरादे
दिल साफ़ हो जिनका वो यहाँ आके सदा दें
मिलता है जहाँ न्याय वो जगह यही है
संसार की सब से बड़ी सरकार यही है

अब सौंप दिया इस जीवन का

अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथो में
है जीत तुम्हारे हाथो में है हार तुम्हारे हाथों में

मेरा निश्चय है एक यही इक बार तुम्हे पा जाऊँ मैं
अर्पण कर दूँ जगती-भर का सब प्यार तुम्हारे हाथों में

या तो मैं जग से दूर रहूँ और जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ
इस पार तुम्हारे हाथो में उस पार तुम्हारे हाथों में

यदी मानुष ही मुझे जनम मिले तब तो चरणों का पुजारी रहूँ
मुझ पूजक की इक रग-रग का हो तार तुम्हारे हाथों में

जब-जब संसार का बंदि बन दरबार में तेरे आऊँ में
हो मेरे पापों का निर्णय सरकार तुम्हारे हाथों में

मुझमें तुझमे है भेद यही मैं नर हूँ तू नारायण हैं
मैं हूँ संसार के हाथों में संसार तुम्हारे हाथों में

ऐ मालिक तेरे

ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम
नेकी पर चले, और बदी से टले
ताकी हसते हुये निकले दम

ये अंधेरा घना छा रहा, तेरा इन्सान घबरा रहा
हो रहा बेख़बर, कुछ ना आता नज़र
सुख का सूरज छुपा जा रहा
हैं तेरी रोशनी में जो दम
तो अमावस को कर दे पूनम
नेकी पर चले, और बदी से टले
ताकी हसते हुये निकले दम

जब जुल्मों का हो सामना
तब तू ही हमें थामना
वो बुराई करे, हम भलाई भरे
नहीं बदले की हो कामना
बढ़ उठे प्यार का हर कदम
और मीटे बैर का ये भरम
नेकी पर चले, और बदी से टले
ताकी हसते हुये निकले दम

ऐ मेरे वतन के लोगों

ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का, लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर ना आये

ऐ मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो क़ुरबानी
तुम भूल ना जाओ उनको, इसलिए सुनो ये कहानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो क़ुरबानी

जब घायल हुआ हिमालय, खतरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो, फिर अपनी लाश बिछा दी,
संगीन पे धर कर माथा, सो गये अमर बलिदानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो क़ुरबानी

जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली,
थे धन्य जवान वो अपने, थी धन्य वो उनकी जवानी

कोई सिख कोई जाट मराठा, कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरनेवाला, हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वत पर, वो खून था हिंदुस्तानी

थी खून से लथ-पथ काया, फिर भी बन्दूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा, फिर गिर गये होश गँवा के
जब अन्त-समय आया तो, कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफ़र करते हैं
क्या लोग थे वो दीवाने, क्या लोग थे वो अभिमानी

तुम भूल न जाओ उनको, इस लिये कही ये कहानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो क़ुरबानी
जय हिन्द जय हिन्द, जय हिन्द की सेना
जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द की सेना
जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द

ऐसा प्यार बहा दे मैया

ऐसा प्यार बहा दे मैया, चरणों से लग जाऊ मैं ।
सब अंधकार मिटा दे मैया, दरस तेरा कर पाऊं मैं ।।

जग मैं आकर जग को मैया, अब तक न मैं पहचान सका
क्यों आया हूँ कहाँ है जाना, यह भी ना मै जान सका
तू है अगम अगोचर मैया, कहो कैसे लख पाऊं मैं

कर कृपा जगदम्बे भवानी, मैं बालक नादान हूँ
नहीं आराधन जप तप जानूं, मैं अवगुण की खान हूँ
दे ऐसा वरदान हे मैया, सुमिरन तेरा ग़ाऊ मैं ।

मै बालक तू माया मेरी, निष् दिन तेरी ओट है
तेरी कृपा से ही मिटेगी, भीतर जो भी खोट है
शरण लगा लो मुझ को मईया, तुझपे बलि बलि जाऊ मैं

अजब हैरान हूं भगवन

अजब हैरान हूं भगवन, तुम्हें कैसे रिझाऊं मैं…
कोई वस्तु नहीं ऐसी, जिसे सेवा में लाऊं मैं…

करूं किस तौर आवाहन, कि तुम मौजूद हो हर जां,
निरादर है बुलाने को, अगर घंटी बजाऊं मैं…

तुम्हीं हो मूर्ति में भी, तुम्हीं व्यापक हो फूलों में,
भला भगवान पर भगवान को कैसे चढाऊं मैं…

लगाना भोग कुछ तुमको, एक अपमान करना है,
खिलाता है जो सब जग को, उसे कैसे खिलाऊं मैं…

तुम्हारी ज्योति से रोशन हैं, सूरज, चांद और तारे,
महा अंधेर है कैसे, तुम्हें दीपक दिखाऊं मैं…

भुजाएं हैं, न सीना है, न गर्दन, है न पेशानी,
कि हैं निर्लेप नारायण, कहां चंदन चढ़ाउं मैं…

आए भी अकेला

आए भी अकेला जाये भी अकेला
दो दिन की ज़िन्दगी है दो दिन का मेला

ज़िन्दगी लिए हैं तूने महल सजाए
मतलब के यार सारे सभी हैं पराए
इनके लिए हैं कितना तूने दुःख झेला

हरी की शरण तू हो जा ध्यान लगाले
जीवन मिले न फिर ये जीवन को पा ले
खेल जगत का सारा उसी ने है खेला

ये ज़िन्दगी है प्यारे एक झूठ सपना
गौरों की दुनिया में नहीं कोई अपना
सबके रहते हुए मैं हूँ अकेला

अल्लाह तेरो नाम

अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
सबको सन्मति दे भगवान

इस धरती का रूप ना उजड़े
प्यार की ठंडी धूप ना उजड़े
सबको मिले, सुख का वरदान

माँगों का सिन्दूर ना छूटे
माँ बहनो की आस ना टूटे
देह बिना, भटके ना प्राण

ओ सारे जग के रखवाले
निर्बल को बल देने वाले
बलवानो को देदे ज्ञान

बच्चे मन के सच्चे

बच्चे मन के सच्चे, सारी जग के आँख के तारे
ये वो नन्हे फूल हैं जो, भगवान को लगते प्यारे

खुद रूठे, खुद मन जाये, फिर हमजोली बन जाये
झगड़ा जिसके साथ करें, अगले ही पल फिर बात करें
इनकी किसी से बैर नहीं, इनके लिये कोई ग़ैर नहीं
इनका भोलापन मिलता है, सबको बाँह पसारे
बच्चे मन के सच्चे …

इन्ससान जब तक बच्चा है, तब तक समझ का कच्चा है
ज्यों ज्यों उसकी उमर बढ़े, मन पर झूठ क मैल चढ़े
क्रोध बढ़े, नफ़रत घेरे, लालच की आदत घेरे
बचपन इन पापों से हटकर अपनी उमर गुज़ारे
बच्चे मन के सच्चे …

तन कोमल मन सुन्दर हैं बच्चे बड़ों से बेहतर
इनमें छूत और छात नहीं, झूठी जात और पात नहीं
भाषा की तक़रार नहीं, मज़हब की दीवार नहीं
इनकी नज़रों में एक हैं, मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे

बड़ी देर भई नंदलाला

बड़ी देर भई नंदलाला तेरी राह तके बृजबाला
ग्वाल-बाल इक-इक से पूछे कहाँ है मुरली वाला रे

कोई ना जाए कुञ्ज गलिन में तुझ बिन कलियाँ चुनने को
तरस रहे हैं जमुना के तट धुन मुरली की सुनने को
अब तो दरस दिखा दे नटखट क्यों दुविधा में डाला रे

संकट में है आज वो धरती जिस पर तूने जनम लिया
पूरा कर दे आज वचन वो गीता में जो तूने दिया
कोई नहीं है तुझ बिन मोहन भारत का रखवाला रे

बन से आजा राम घर आई

बन से आजा राम घर आई

बनवारी रे, जीने का सहारा

बनवारी रे, जीने का सहारा तेरा नाम रे
मुझे दुनियावालों से क्या काम रे?

झूठी दुनिया, झूठे बंधन, झूठी है ये माया
झूठा साँस का आना-जाना, झूठी है ये काया
हो, यहाँ साचों तेरो नाम रे

रंग में तेरे रंग गई गिरधर, छोड़ दिया जग सारा
बन गई तेरे प्रेम की जोगन लेकर मन इक तारा
हो, मुझे प्यारा तेरा धाम रे

दर्शन तेरा जिस दिन पाऊँ, हर चिंता मिट जाए
जीवन मेरा इन चरणों में आस की ज्योत जलाए
हो, मेरी बाह पकड़ लो श्याम रे

दुनियां वालो देव दयानंद

दुनियां वालो देव दयानंद दीप जलाने आया था |
भूल चुके थे राहें अपनी वह दिखलाने लाया था |

घोर अँधेरा जग में छाया नजर नही कुछ आता था |
मानव मानव की ठोकर से जब ठुकराया जाता था |

आर्य जाति सोई पड़ी थी घर घर जा के जगाता था |
दुनियां वालो देव दयानंद दीप जलाने आया था |१

बंट गया सारा टुकड़े टुकड़े भारत देश जागीरो में |
शासन करते लोग विदेशी जोश नही था वीरो में |
भारत माँ को मुक्त किया जो जकड़ी हुयी थी जंजीरों में |
दुनिया वालो देव दयानंद दीप जलाने आया था |२

जब तक जग में चार दिशाएं कुदरत के ये नजारे है |
सागर,नदियां,धरती ,अम्बर ,जंगल ,पर्वत सारे है |
पथिक रहेगा नाम ऋषि का जब तक चाँद सितारे है |
दुनिया वालो देव दयानंद दीप जलाने आया था |
भूल चुके थे राहें अपनी वह दिखलाने आया था |३
by Rajendra P.Arya

देश-भक्त – आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम …

ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की

देखो मुल्क मराठों का ये यहाँ शिवाजी डोला था
मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पावत पे आग लगी थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था
यहाँ शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की 

जलियाँ वाला बाग ये देखो यहाँ चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इनक़लाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की

देश-भक्त – कदम-कदम बढ़ाये जा

कदम-कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा
ये ज़िन्दगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाये जा

तू शेर-ए-हिन्द आगे बढ़, मरने से तू कभी ना डर
उड़ा के दुश्मनों का सर, जोश-ए-वतन बढ़ाये जा
कदम-कदम बढ़ाये जा…

तेरी हिम्मत बढ़ती रहे, खुदा तेरी सुनता रहे
जो सामने तेरे अड़े, तो ख़ाक में मिलाये जा
कदम-कदम बढ़ाये जा…

चलो दिल्ली पुकार के, गम-ए-निशां सम्भाल के
लाल किले पे गाड़ के, लहराये जा, लहराये जा
कदम-कदम बढ़ाये जा

देश-भक्त – मेरा जूता है जापानी

मेरा जूता है जापानी ये पतलून इंगलिश्तानी
सर पे लाल टोपी रूसी फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी

निकल पड़े हैं खुल्ली सड़क पर अपना सीना ताने
मंजिल कहाँ, कहाँ रुकना है,उपरवाला जाने
बढ़ते जाए हम सैलानी, जैसे एक दरिया तूफानी
सर पे लाल टोपी रूसी

ऊपर-नीचे नीचे-ऊपर लहर चले जीवन की
नादान है जो बैठ किनारे, पूछे राह वतन की
चलना जीवन की कहानी, रुकना मौत की निशानी

होंगे राजे राजकुंवर हम बिगडे दिल शहज़ादे
हम सिंघासन पर जा बैठें जब जब करें इरादे
सूरत है जानी पहचानी दुनिया वालों को हैरानी

देश-भक्त – मेरे देश की धरती

मेरे देश की धरती
सोना उगले
उगले हीरे मोती

बैलों के गले में जब घुँघरू
जीवन का राग सुनाते हैं
गम कोसों दूर हो जाता है
खुशियों के कँवल मुसकाते हैं
सुन के रहट की आवाज़ें
यूँ लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के
दुल्हन की तरह हर खेत सजे
मेरे देश की धरती…

जब चलते हैं इस धरती पे हल
ममता अंगड़ाईयाँ लेती हैं
क्यों ना पूजें इस माटी को
जो जीवन का सुख देती है
इस धरती पे जिसने जनम लिया
उसने ही पाया प्यार तेरा
यहाँ अपना पराया कोई नहीं
है सब पे माँ, उपकार तेरा
मेरे देश की धरती…

ये बाग़ है गौतम नानक का
खिलते हैं अमन के फूल यहाँ
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक
ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ
रंग हरा हरी सिंह नलवे से
रंग लाल है लाल बहादूर से
रंग बना बसन्ती भगत सिंह
रंग अमन का वीर जवाहर से
मेरे देश की धरती…

देश-भक्त – वतन की राह में

वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो
पुकारते हैं ये ज़मीन-ओ-आसमां शहीद हो

शहीद तेरी मौत ही तेरे वतन की ज़िंदगी
तेरे लहू से जाग उठेगी इस चमन में ज़िंदगी
खिलेंगे फूल उस जगह कि तू जहाँ शहीद हो, वतन की …

गुलाम उठ वतन के दुश्मनों से इंतक़ाम ले
इन अपने दोनों बाजुओं से खंजरों का काम ले
चमन के वास्ते चमन के बाग़बां शहीद हो, वतन की …

पहाड़ तक भी कांपने लगे तेरे जुनून से
तू आसमां पे इन्क़लाब लिख दे अपने खून से
ज़मीं नहीं तेरा वतन है आसमां शहीद हो, वतन की …

वतन की लाज जिसको थी अजीज़ अपनी जान से
वो नौजवान जा रहा है आज कितनी शान से
इस एक जवान की खाक पर हर इक जवां शहीद हो
वतन की …

है कौन खुशनसीब माँ कि जिसका ये चिराग़ है
वो खुशनसीब है कहाँ ये जिसके सर का ताज है
अमर वो देश क्यूँ न हो कि तू जहाँ शहीद हो, वतन की …

जय जय पिता परम

जय जय पिता परम आनन्द दाता |
जगदादि कारण मुक्ति प्रदाता ||
अनन्त और अनादि विशेषण हैं तेरे |
सृष्टि का स्रष्टा तू धर्ता संहर्ता ||
सूक्ष्म से सूक्ष्म तू है स्थूल इतना |
कि जिसमें यह ब्रह्माण्ड सारा समाता ||
मैं लालित व पालित हूँ पितृ स्नेह का |
यह प्राकृत सम्बन्ध है तुझसे ताता ||
करो शुद्ध निर्मल मेरे आत्मा को |
करूँ मैं विनय नित्य सायं व प्रातः ||
मिटाओ मेरे भय आवागमन के |
फिरूँ न जन्म पाता और बिलबिलाता ||
बिना तेरे हैं कौन दीनन का बन्धु |
कि जिसको मैं अपनी अवस्था सुनाता ||
“अमीं” रस पिलाओ कृपा कर के मुझको ||
रहूँ सर्वदा तेरी कीर्ति को गाता ||


जन्मदिन – अति धन्यवाद परमेश्वर

अति धन्यवाद परमेश्वर का यह सुन्दर अवसर आया
है जन्म-दिवस इस बालक का जो उत्सव आज मनाया है

ईश्वर-विश्वासी सत्यवादी वेदों का यह अनुयायी हो
दिन-रात फले-फूले निरोग हो सुन्दर इस्की काया हो

विश्वानो का सम्मान करे गुरु मात-पिता का सेवक हो
दुखियो के दुःख दूर करे जो वेदों ने बतलाया है

सदग्रंथ पढ़े सदाचरण करे जीवन में ज्योति जगा रहे
यशा कीर्ति अमर होव इसकी आवे न मान मद माया है

शुभ गुण संपन्न बने बालक है आशीर्वाद यही सबका
सबको सुखदायक सदा रहे जो गति वेद ने गया है

जन्मदिन – बार बार दिन ये आये

बार बार दिन ये आये, बार बार दिल ये गाये
तू जिए हज़ारों साल, ये मेरी है आरज़ू
Happy Birthday to you
Happy Birthday to you
Happy Birthday to Sunita
Happy Birthday to you

बेक़रार हो के दामन, थाम लूँ मैं किसका
क्या मिसाल दूँ मैं तेरी, नाम लूँ मैं किसका
नहीं, नहीं, ऐसा हसीं, कोई नहीं है
जिसपे ये नज़र रुक जाये, बेमिसाल जो कहलाये
तू जिये हज़ारों साल…

औरों की तरह कुछ मैं भी, तोहफ़ा आज लाता
मैं तेरी हसीं महफ़िल में, फूल ले के आता
जी ने कहा, उसे क्या है, फूलों की ज़रूरत
जो बहार खुद कहलाये, हर कली का दिल धड़काये
तू जिये हज़ारों साल…

फूलों ने चमन से तुझको, है सलाम भेजा
तारों ने गगन से तुझको, ये पयाम भेजा
दुआ है ये, खुदा करे, ऐ शोख तुझको
चाँद की उमर लग जाए, आये तो क़यामत आये
तू जिए हज़ारों साल

पूजनीय प्रभो

पूजनीय प्रभो हमारे भाव उज्जवल कीजिये ।
छोड़ देवे छल-कपट को मानसिक बल दीजिये।।

वेद की बोलें ऋचाएँ सत्य को धारण करें।
हर्ष में हो मग्न सारे शोक-सागर से तेरे।।

अश्वमेधादिक रचाएं यज्ञ पर-उपकार को।
धर्म मर्यादा चलाकर लाभ दें संसार को।।

नित्य श्रद्धा-भक्ति से यज्ञादि हम करते रहें।
रोग पीड़ित विश्व के सन्ताप सब हरते रहें।।

भावना मिट जाये मन से पाप अत्याचार की।
कामनाए पूर्ण होवें यज्ञ से नर-नारी की

लाभकारी हो हवन हर जीवधारी के लीए।
वायु जल सर्वत्र हों शुभ गन्ध को धारण किए।।

स्वार्थ-भाव मिटे हमारा प्रेम पथ विस्तार हो।
“इदन्न मम” का सार्थक प्रत्येक में व्यवहार हो।।

हाथ जोड़ झुकाये मस्तक वन्दना हम कर रहे।
नाथ करुणारूप करुणा आपकी सब पर रहे।।

जय जगदीश हरे

जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे, ओम जय…

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का, स्वामी …
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का, ओम जय…

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी, स्वामी …
तुम बिन और न दूजा, आश करूँ किसकी, ओम जय…

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी, स्वामी …
परम ब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी, ओम जय…

तुम करुणा के सागर, तुम पालन करता, स्वामी …
दीन दयालु कृपालु, कृपा करो भरता, ओम जय…

तुम हो एक अगोचर सबके प्राण पति,स्वामी …
किस विधि मिलूँ दयामी, तुमको मैं कुमति, ओम जय…

दीन बंधु दुख हरता, तुम रक्षक मेरे, स्वामी …
करुणा हस्त बढ़ाओ, शरण पड़ूं मैं तेरे, ओम जय…

विषय विकार मिटावो पाप हरो देवा, स्वामी …
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ संतन की सेवा, ओम जय…

जिसका साथी है भगवान

जिसका साथी है भगवान
उसको क्या रोकेगा
आँधी और तूफान

गगन चुर हो जाए ज़मी
चाहे सागर में धस जाए
तुफानो की गोद में चाहे
सारा जग खो जाए
पाँव न रुकने पाए

जिसके शीश पे हाथ हज़ारो
छू ना कोई पाएगा
हरी नाम से पर्वत
तिनका बन जाएगा
धूल में मिल जाएगा

मुझे अपनी शरण में ले लो राम

मुझे अपनी शरण में ले लो राम, ले लो राम!
लोचन मन में जगह न हो तो
जुगल चरण में ले लो राम, ले लो राम!

जीवन देके जाल बिछाया
रच के माया नाच नचया
चिन्ता मेरी तभी मिटेगी
जब चिन्तन में ले लो राम, ले लो राम!
मुझे अपनी शरण में ले लो राम!

तू ने लाखोँ पापी तारे
मेरी बारी बाजी हारे, बाजी हारे
मेरे पास न पुण्य की पूँजी
पद पूजन में ले लो राम, ले लो राम!
मुझे अपनी शरण में ले लो राम!

राम हे राम, राम हे राम
दर दर भटकूँ घर घर अटकूँ
कहाँ कहाँ अपना सर पटकूँ
इस जीवन में मिलो न तुम तो राम, हे राम!
इस जीवन में मिलो न तुम तो,
मुझे मरण में ले लो राम, ले लो राम!

मुझे अपनी शरण में ले लो राम, ले लो राम!
लोचन मन में जगह न हो तो
जुगल चरण में ले लो राम, ले लो राम!

नदिया ना पिए कभी अपना जल

नदिया ना पिए कभी अपना जल, वृक्ष ना खाए कभी अपने फल ।
अपने तन का मन का धन का दूजों को दे जो दान है,
वो सच्चा इंसान, अरे इस धरती का भगवन है ॥

अगर सा जिस का अंग जले और दुनिया को मीठी स्वास दे ।
दीपक सा उसका जीवन है, जो दूजों को अपना प्रकाश दे ।
धर्म है जिस का भगवत गीता, सेवा वेद कुरान है,
वो सच्चा इंसान, अरे इस धरती का भगवन है ॥

चाहे कोई गुण गान करे, चाहे करे निंदा कोई ।
फूलों से कोई सत्कार करे, कांटे चुभो जाए कोई ।
मान और अपमान ही दोनों, जिसके लिए सामान है,
वो सच्चा इंसान, अरे इस धरती का भगवन है ॥

सुख के सब साथी

सुख के सब साथी, दुःख में ना कोई
मेरे राम, मेरे राम
तेरा नाम एक सांचा, दूजा न कोई

जीवन आनी-जानी छाया
झूठी माया झूठी काया
फिर काहे को सारी उमरिया
पाप की गठरी ढोई

ना कुछ तेरा ना कुछ मेरा
ये जग जोगी वाला फेरा
राजा हो या रंक सभी का
अंत एक सा होई

तेरे मन में राम तन में राम

तेरे मन में राम तन में राम
रोम-रोम में राम रे
राम सुमिर ले ध्यान लगा ले छोड़ जगत के काम रे
बोलो राम राम राम बोलो राम राम राम

माया में उलझा-उलझा दर-दर धूल उड़ाए
अब क्यों करता मन भारी जब माया साथ छुड़ाए
दिन तो बीता दौड़ धूप में
ढल जाए न शाम रे
बोलो राम राम राम बोलो राम राम राम

तन के भीतर पाँच लुटेरे डाल रहे हैं डेरा
काम, क्रोध, मद्, लोभ, मोह ने तुझको कैसा घेरा
भूल गया तू राम रतन
भूला पूजा का काम रे
बोलो राम राम राम बोलो राम राम राम

बचपन बीता खेल-खेल में भरी जवानी सोया
देख बढ़ापा अब क्यों सोचे क्या पाया क्या खोया
देर नहीं है अब भी बन्दे
ले ले उसका नाम रे
बोलो राम राम राम बोलो राम राम राम

तू प्यार का सागर है

तू प्यार का सागर है,
तेरी एक बूँद के प्यासे हम
लौटा जो दिया तूने, चले जायेंगे जहां से हम

घायल मन का पागल पंछी उड़ने को बेकरार
पंख हैं कोमल, आँख है धुंदली, जाना है सागर पार
अब तू ही इसे समझा,
राह भूले थे कहाँ से हम

इधर झूम के गाए जिन्दगी, उधर है मौत खडी
कोई क्या जाने कहाँ है सीमा,
उलझन आन पडी
कानों में ज़रा कह दे के आए कौन दिशा से हम

तुम हो प्रभु चाँद

तुम हो प्रभु चाँद मैं हूँ चकोरा |
तुम हो कँवल फूल मैं रस का भौंरा
ज्योति तुम्हारी का मैं हूँ पतंगा
आनन्द घन तुम हो, मैं वन का भौंरा
जैसे हो चुम्बक की लोहे से प्रीति
आकर्षण करे मोहे लगातार तोरा
पानी बिन जैसे हो मीन व्याकुल
ऐसे ही तडपाये तुमरा बिछौडा
इक बूँद जल का मैं प्यासा हूँ चातक
अमृत की करो वर्षा हरो ताप मोरा

तुम्हीं हो माता

तुम्हीं हो माता, पिता तुम्ही हो,
तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो

तुम्ही हो साथी तुम्ही सहारे,
कोई न अपना सिवा तुम्हारे
तुम्ही हो नय्या तुम्ही खिवय्या,
तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो

जो खिल सके ना वो फूल हम हैं,
तुम्हारे चरनों की धूल हम हैं
दया की दृष्टि सदा ही रखना,
तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो

तुम्हीं मेरे मंदिर

तुम्हीं मेरे मंदिर, तुम्हीं मेरी पूजा, तुम्हीं देवता हो
कोई मेरी आँखों से देखे तो समझे, कि तुम मेरे क्या हो

जिधर देखती हूँ उधर तुम ही तुम हो
न जाने मगर किन खयालों में गुम हो
मुझे देखकर तुम ज़रा मुस्कुरा दो
नहीं तो मैं समझूँगी, मुझसे ख़फ़ा हो

तुम्हीं मेरे माथे की बिंदिया की झिल-मिल
तुम्हीं मेरे हाथों के गजरों की मंज़िल
मैं हूँ एक छोटी-सी माटी की गुड़िया
तुम्हीं प्राण मेरे, तुम्हीं आत्मा हो

बहुत रात बीती चलो मैं सुला दूँ
पवन छेड़े सर्गम मैं लोरी सुना दूँ
तुम्हें देखकर यह ख़याल आ रहा है
कि जैसे फ़रिश्ता कोई सो रहा है

उठ जाग मुसाफिर

उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो सोवत है |
जो सोवत है सो खोवत है, जो जगत है सोई पावत है ||

टुक नींद से अखि खोल जरा, और अपने ईश में ध्यान लगा |
यह प्रीत कारन की रीत नहीं, प्रभु जागत है तू सोवत है ||

जो कल करना सो आज करले , जो आज करना सो अब करले |
जब चिड़ियो ने चुग खेत लिया, फिर पछताये क्या होवत है ||

नादान भुगत करनी अपनी, ऐ पापी पाप मै चैन कहाँ |
जब पाप की गठड़ी सीस धरी, फिर सीस पकड़ क्यूँ रोवत है ||

विवाह – बाबुल कौन घडी

बाबुल कौन घडी ये आ यी
कल थी मैं तेरी लाडली बेटी
हो गयी आज परायी

साजन का जब आये बुलावा
कोई भड़ा मने राधा
तोड़ के पिंजरा उड़ जाये चिड़िया
रोये चाहे सहनाई

सोलह बरस तूने गोद खिलाया
बाहों में ले कर झूला झुलाया
गले लगाया आज न क्यों जब
मेरी हुयी विदाई

पीहर से जब ढोली जाये
दुनिया हीरे मोती लुटाये
लेकिन मैंने क़िस्मत
आँशु दाहरज में लायी

विवाह – बहारों फूल बरसाओ

बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है
हवाओं रागिनी गाओ मेरा महबूब आया है

ओ लाली फूल की मेंहँदी लगा इन गोरे हाथों में
उतर आ ऐ घटा काजल, लगा इन प्यारी आँखों में
सितारों माँग भर जाओ मेरा महबूब आया है

नज़ारों हर तरफ़ अब तान दो इक नूर की चादर
बडा शर्मीला दिलबर है, चला जाये न शरमा कर
ज़रा तुम दिल को बहलाओ मेरा महबूब आया है

सजाई है जवाँ कलियों ने अब ये सेज उल्फ़त की
इन्हें मालूम था आएगी इक दिन ऋतु मुहब्बत की
फ़िज़ाओं रंग बिखराओ मेरा महबूब आया है

ज़िन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र

ज़िन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं
है ये कैसी डगर चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

ज़िन्दगी को बहुत प्यार हमने दिया
मौत से भी मोहब्बत निभायेंगे हम
रोते रोते ज़माने में आये मगर
हँसते हँसते ज़माने से जायेंगे हम
जायेंगे पर किधर है किसे ये खबर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं

ऐसे जीवन भी हैं जो जिये ही नहीं
जिनको जीने से पहले ही मौत आ गयी
फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं
जिनको खिलने से पहले फिजां खा गयी
है परेशां नज़र थक गये चारागर
कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं