भगवत भजन की ज्योती

भगवत भजन की ज्योती

भगवत भजन की ज्योती हृदय में तू जगाले
दुनिया की उलझनोे मन को ज़रा हटा ले

हासिल यदि है करभगवा का सखापन
प उसका पहले अपना उसे बा ले

अव्यास करते-करते धो आत्मा के मल को
सागर न्द के में जी भर के फिर हा ले

बातों े काम कोई पूरा कभी होता
वाणी े जो कहा है करके उसे दिखा ले

वेदों के ज्ञान द्वारा दीदार कर प्रभु का
दूई का भाव दिल े अपने ज़रा हटा ले