Holi Songs – Hindi

ौताल – सखी ये दोउ भूपकिोर

सखी ये दोउ भूपकिोर समाजमें आई। 

कठि कठोर धनुष शंकरको,नहि कोउ लेत उठाई। 
भूप सहस दश एकहि बारा हो, 
धनु छुवत दू होइ जाई समाजमें आई। 

थोक वीर धनुष नहि हालत, किहो अनेक अपाई। 
तोरिहैं धनुष अवधके बालक 
दोउ कुँवर खड़े मुसकाई समाजमें आई। 

गुरु आज्ञा लै उठें रामजी, धनुहां हाँथ लगाई। 
लेत उठावत कोउ नहिं देखो हों,
धनु तोरिकै देत बहाई समाजमें आई। 

टूट पिाक शब्द भय भारी, रविरथ नहिं ठहराई। 
तुलसीदा हिये हुलसी हुलसी कहि,
सब देवनके मन भाई समाजमें आई। 


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