धमारि – श्याम करैं लरिकाई
रोकत नारी पराई जशोदा श्याम करैं लरिकाई।
बरबस उठे नन्दके ढोटा, ग्वाल सखा लै धाई।
सब कर लिहे कनक पिचकारी, छतियां पर देत चलाई।
भीजि गई मोरि चुँदरी चोला, आप खड़ा मुसकाई।
ओरहन देन चली तुमरे ढिग, बरजो कुँअर कन्हाई।
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