चौताल – गोकुला बिच जनमे
गोकुला बिच जनमे कन्हाई सुरन सुखदाई।
जेहि दिन भयो कान्हाको, देव सुमन झरिलाई।
सुर ब्रह्मादि सभै चलि आयो हो,
जाके चरण कमल शिर नाई सुरन सुखदाई।
एक समय पूजाके कारण, सुरपति गयो रिसाई।
मूसरधार मेघ जल बरसत,
सब गोकुल लेत बचाई सुरन सुखदाई।
एक समय गेंदाके कारन, जमुना कूदे कन्हाई।
पैठि पताल नाग फन नाथे हो,
जाके फनपर बेन बजाई सुरन सुखदाई।
एक समय गउवन कर बाछा ब्रह्मा लीन चोराई।
दीनदयाल सभै को सिरजता,
जिनसे कोई पार न पाई सुरन सुखदाई।
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