चौताल – मुनि माँगत राजा राम
मुनि माँगत राजा राम लषन मोहिं दीजे
असुर समूह सतावत मोहिं, राम लषन को दीजै
संग मोरे चलहिं निशाचर मारहिं
रउरे इतना सुयश जग लीजे लषन मोहिं दीजे
सूख़ गयो बतिया सुनी मुनिकी, कवन उतर हम दीजै
राम लषन मोरी आँखिकै पुतरी हो
अब कवन जतन हम कीजे लषन मोहिं दीजे
चारों तनय प्रानसम मोरे औरनको मुनि लीजै
दोउ करकमल जोरि मुनि आगे हो
जल दृजन बहै तन भीजै लषन मोहिं दीजे
मुनि समझाय कह्यो राजासे, शाप दऊँ कुल छीजै
गई सब शोच महीपति मनकी हो
दैके राम बिदा मुनि कीजै लषन मोहिं दीजे
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