चौताल
कान्हा देत मुसुकियन गारी धरे मेरी सारी
गोकुला बिच जनमे कन्हाई सुरन सुखदाई
गौरी पूजत जनक दुलारी बैठी फुलवारी
देवी शारद सुमिरि मनावो ह्रदय से जानी
धनि धनि सिया तेरी भागी राम वर पायो
धनु भंग सुनो भृगुनाथ परशु लाई धायो
मुनि माँगत राजा राम लषन मोहिं दीजे
रघुनन्दन अवधबिहारी केशर रंग मारी
शिव शंकर दीनदयाल महा वरदानी
सखी ये दोउ भूपकिसोर समाजमें आई
बेलवारा
बृज करत बिहार शाम राधिका दोनों जेन
धमारि
आवे न कोई काम राम बिनु लाख करो चतुराई
देखन चले फुलवारी
नदी बहै जलधारा
व्रज में हरि होरी मचाई
श्याम करैं लरिकाई
सिया डाले राम गले जयमाला
सूजन जान राम राम कहु भाई
जोगीरा
जोगी सा रा रा
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