Holi Songs – Hindi

ौताल – धनु भंग नो भृगुनाथ

धनु भंग नो भृगुनाथ परशु लाई धायो। 

ंतस्वरूप बीर तन ोहे, रोष भरे चलि आयो। 
देखन भूप भयो तन ब्ाकुल,
बिु पूछत नाम बतायो परशु लाई धायो। 

कौशिक राम लषन मिथिलापति, आई सभै शिर यो। 
पूछत हाल जनक नहिं बोलत,
करि कोप कुठार उठाा परशु लाई धायो। 

कांपे जनक सभै मिथिलापुर, लछिमन रोष दिखायो। 
का अतिूक भई भृगुायक,
केहि कारण रोष बढ़ायो परशु लाई धायो। 

लषन कहा िये मुिायक, का अपराध लगाा। 
रामशरण भजिा रघुवरजीको,
हम रामजन्म ि पायो परशु लाई धायो


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.